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टीम इंडिया से बाहर चल रहे मुरली विजय का छलका दर्द, बोले-‘नहीं मिली वीरेंद्र सहवाग जैसी….’

लंबे समय से भारतीय टीम में अपने चयन का इंतजार करके थक चुके सलामी बल्लेबाज मुरली विजय ने भारतीय टीम के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग की जमकर तारीफ की है। इसके अलावा उन्होंने अपने दर्द को भी बयां किया है उनका मानना है कि यदि टीम मैनेजमेंट की तरफ से उन्हें भी वीरेंद्र सहवाग जैसी बैकिंग मिली होती तो आज चीजें कुछ अलग होती। आपको बता दें भारतीय टीम के धाकड़ बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के संन्यास लेने के बाद भारत को टेस्ट क्रिकेट में एक बेहतरीन ओपनर की तलाश थी। उस जगह को भरने के लिए टीम मैनेजमेंट ने मुरली विजय और शिखर धवन जैसे बल्लेबाजों को आजमाया परंतु कोई भी उतना कामयाब नहीं रहा।

सहवाग जैसी आजादी नहीं मिली

स्पोर्ट्स स्टार से एक इंटरव्यू के दौरान मुरली विजय ने कहा कि, अगर मैं सच बोलूं तो मुझे वीरेंद्र सहवाग जैसी आजादी नहीं मिली। वीरेंद्र सहवाग को टेस्ट क्रिकेट मैच खेलते वक्त जो कुछ भी उनके कैरियर में मिला, वह मुझे नहीं हासिल हुआ।अगर टीम मैनेजमेंट की तरफ से मुझे भी उसी प्रकार की आजादी मिलती तो मैं भी कुछ ऐसा कर सकता था। उन्होंने कहा कि “जब आप अंतर्राष्ट्रीय लेवल पर खेलते हैं तो आपकी टीम से आपको किस प्रकार की बैंकिंग मिलती है वह आपके प्रदर्शन पर असर डालता है। उस लेवल पर अलग-अलग चीजों को लेकर ज्यादा एक्सपेरिमेंट करने का समय नहीं मिलता।”

बाहरी टीम से खेलने को देख रहे मुरली विजय

38 वर्षीय दाएं हाथ के बल्लेबाज मुरली विजय ने भारत की तरफ से 61 टेस्ट मैचों में 3982 रन बनाए हैं। जिस दौरान उनका औसत 38.29 का रहा है। टेस्ट क्रिकेट में मुरली विजय के नाम 12 शतक और 15 अर्धशतक हैं। इसके अलावा उन्हें वनडे और टी-20 क्रिकेट में भारतीय टीम के प्रतिनिधित्व करने के अधिक मौके नहीं मिले। मुरली विजय का मानना है कि अभी उनके अंदर काफी क्रिकेट बचा है। क्योंकि उन्हें भारत में खेलने का मौका नहीं मिल रहा है तो वह बाहर जाने के बारे में भी विचार कर रहे हैं।

वीरेंद्र सहवाग की जमकर तारीफ

स्पोर्ट स्टार को दिए गए इंटरव्यू में मुरली विजय ने वीरेंद्र सहवाग की तारीफों का पुल बांधने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि “वीरेंद्र सहवाग ने जिस प्रकार से बैटिंग की है, वह केवल वही कर सकते थे और कोई नहीं‌। उन्होंने भारतीय क्रिकेट के लिए जो कुछ किया है वह शानदार है ।वह कुछ अलग अंदाज वाले इंसान हैं। उनके द्वारा दिया गया मंत्र बेहद सिंपल था। वह कहते हैं कि गेंद को देखो और हिट करो। मैंने उन्हें 140 से 150 किलोमीटर की रफ्तार वाली गेंदों को गुनगुनाते हुए खेलते देखा है।

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