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पुजारी से फेमस क्रिकेटर पुजारा बनने की कहानी, हैमस्ट्रिंग बोन टूटा तो शाहरुख ने बढ़ाया मदद का हाथ, जाने सबकुछ

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चार मैचों की टेस्ट सीरीज बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी का दूसरा मुकाबला दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम पर खेला जा रहा है। इस टेस्ट मैच को टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा अपने 100 वें इंटरनेशनल टेस्ट मैच के रूप में खेल रहे हैं। 35 वर्षीय चेतेश्वर पुजारा भारत की तरफ से 100 टेस्ट मैच खेलने वाले 13 वें खिलाड़ी बने हैं। चेतेश्वर पुजारा का करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। चेतेश्वर पुजारा ने 17 साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया था। जबकि साल 2009 में वह हैमस्ट्रिंग बोन इंजरी का शिकार हुए थे। चेतेश्वर पुजारा के लिए यह उपलब्धि हासिल करने के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प और संघर्ष भरी रही है। आइए इस पर एक नजर डालते हैं।

पूजा करने पर मिलता था खेलने का मौका

गुजरात के राजकोट में 25 जनवरी 1988 को एक हिंदू ब्राह्मण परिवार में जन्मे पुजारा को वीडियो गेम खेलने का शौक था। पुजारा की मां रीमा ने बाल्यकाल में उनके सामने एक रोचक शर्त रखा था। उनका कहना था कि यदि पुजारा 10 मिनट तक उनके साथ पूजा-पाठ में हिस्सा नहीं लेगा तो उसे वीडियो गेम खेलने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुजारा की मां रीमा एक धार्मिक प्रवृति की महिला थी इस वजह से उन्होंने चेतेश्वर पुजारा को पूजा-पाठ में संलिप्त करने के लिए ऐसी रोचक शर्त रखी थी। जिसके पास वीडियो गेम खेलने के शौकीन नन्हे पुजारा प्रतिदिन अपनी मां के साथ पूजा पाठ करने लग गए। पुजारा के जीवन में उस वक्त भूचाल आ गया जब 17 साल की उम्र में उनकी मां का निधन हो गया।

साल 2005 में चेतेश्वर पुजारा अंडर-19 खेलकर वापस लौटे थे। घर लौटने के लिए चेतेश्वर पुजारा ने अपनी मां को फोन लगाया और पिताजी को बस स्टैंड पर भेजने का आग्रह किया। परंतु इस दौरान ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। बस स्टैंड पर उनके पिता नहीं बल्कि एक रिश्तेदार आए और उन्होंने बताया कि पुजारा की मां का निधन हो चुका है। जिसके बाद वह शोक में डूब गए।चेतेश्वर पुजारा ने इसी वर्ष रणजी में भी डेब्यू किया था।

जब शाहरुख खान ने बढ़ाया मदद हाथ

साल 2009 में साउथ अफ्रीका की मेजबानी में आयोजित IPL के दूसरे संस्करण में कोलकाता नाइट राइडर्स की तरफ से खेलते हुए चेतेश्वर पुजारा की हैमस्ट्रिंग बोन टूट गई।जिसके बाद पुजारा के परिवार वाले उन्हें राजकोट लाना चाहते थे। परंतु टीम के मालिक शाहरुख खान ने उनके परिजनों से बात की और दक्षिण अफ्रीका में ही उनकी सर्जरी करवाई। उस वक्त शाहरुख खान ने पुजारा के पिता का पासपोर्ट बनवाकर उन्हें साउथ अफ्रीका बुला लिया था।

जिसके बाद चेतेश्वर पुजारा ने साल 2010 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ एम चिन्नास्वामी स्टेडियम पर अपना टेस्ट डेब्यू किया। तब से चेतेश्वर पुजारा ने अपने करियर में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा है। उन्होंने अब तक 99 टेस्ट मैचों के 169 इंनिग्स में 44.16 की औसत से 7021 रन बनाए हैं। जिसमें उनके नाम 19 शतक, तीन दोहरे शतक और 34 अर्धशतक दर्ज हैं। खेल में महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें साल 2017 में प्रसिद्ध अर्जुन पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।

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