इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) निस्संदेह इस दुनिया की सबसे मनोरंजक लीग है।इस टूर्नामेंट ने जहां कई यादगार लम्हों को देखा है, वहीं इसने कुछ काले दिन भी देखे हैं। साल 2008 में अपनी स्थापना के बाद से इसमें कई विवाद हुए हैं। इस वर्ष IPL का 16वां संस्करण खेला जाएगा और इससे पहले आइए हम इंडियन प्रीमियर लीग के इतिहास के शीर्ष 5 सबसे बड़े विवादों के बारे में जान लेते हैं।
2013 स्पॉट फिक्सिंग कांड
यह आईपीएल का सबसे बड़ा विवाद था। भारत के पूर्व तेज गेंदबाज एस. श्रीसंत सहित राजस्थान रॉयल्स के तीन खिलाड़ियों को दिल्ली पुलिस ने 2013 सत्र के दौरान स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में गिरफ्तार किया।खिलाड़ियों पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने एक विशेष ओवर में एक निश्चित संख्या में रन देने के लिए सट्टेबाजों से पैसे लिए थे।इस फिक्सिंग के कारण तीन खिलाड़ियों को निलंबित कर दिया गया और फ्रेंचाइजी को IPL से दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया।
चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स का निलंबन
चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स को साल 2015 में दो सत्रों के लिए IPL से निलंबित कर दिया गया था, क्योंकि 2013 के स्पॉट फिक्सिंग कांड में उनके मालिकों की संलिप्तता थी।फ्रेंचाइजी के मालिक, CSK के गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के राज कुंद्रा को सट्टेबाजी का दोषी पाया गया और बाद में उन्हें जीवन भर के लिए क्रिकेट से जुड़ी सभी गतिविधियों से प्रतिबंधित कर दिया गया।
हरभजन-श्रीसंत थप्पड़ कांड
2008 में IPL के उद्घाटन संस्करण के दौरान, मुंबई इंडियंस के हरभजन सिंह और किंग्स इलेवन पंजाब के एस. श्रीसंत के बीच एक गर्म बहस छिड़ गई।जिसमें हरभजन ने कथित तौर पर श्रीसंत को थप्पड़ मारा और यह घटना कैमरे में कैद हो गई। जिसके बाद BCCI ने हरभजन सिंह को IPL के शेष सत्र के लिए प्रतिबंधित कर दिया। इसके अलावा उनके ऊपर 11 एकदिवसीय मैचों के लिए भी प्रतिबंध लगाया गया।
ललित मोदी विवाद
IPL के संस्थापक ललित मोदी 2010 में एक विवाद में फंस गए थे। उन पर IPL के पहले तीन सत्रों के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और धन के कुप्रबंधन का आरोप लगाया गया था।विवाद के कारण 2010 में उन्हें लीग से बाहर कर दिया गया। ललित मोदी लंदन में चला गया और तब से वह भारतीय क्रिकेट में एक विवादास्पद व्यक्ति बना हुआ हैं।
कोच्चि टस्कर्स केरल टर्मिनेशन
कोच्चि टस्कर्स केरल एक फ्रेंचाइजी थी, जिसे साल 2011 में IPL में जोड़ा गया था। हालांकि, फ्रेंचाइजी समझौते के कथित उल्लंघन के कारण 2012 में BCCI द्वारा इसे समाप्त कर दिया गया। जिसके बाद फ्रैंचाइज़ी के मालिकों ने टर्मिनेशन को अदालत में चुनौती दी, लेकिन मामला खारिज हो गया।



